दुर्घटना द्वार बने रेलवे के अंडरपास!!
@सुनील सत्यम
"शून्य दुर्घटना अभियान" चलाते हुए
पूर्व संप्रग सरकार के समय 2010 से भारतीय रेलवे ने अपने नेटवर्क से मानव रहित फाटक समाप्त करने की कार्य योजना पर कार्य शुरु किया था जो आज भी जारी है।रेलवे ने एक उपयोजना के रूप में इसकी शुरुआत की थी।देश के अधिकांश मानव रहित फाटको के स्थान पर रेलवे द्वारा तेजी से भूमिगत पारगमन पथ (अंडरपास) बनाने का काम या तो पूरा कर लिया गया है अथवा वहां निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस योजना के तहत रेलवे द्वारा वर्तमान फाटकों के स्थान पर ही पटरी के नीचे खुदाई करके भूमिगत पारगमन पथ (अंडरपास) बनाये जा रहे है।इस कार्य से संबंधित स्थान पर रेल एवं सड़क परिवहन बाधित न हो ,इसके लिये रेडीमेड कंक्रीट ब्लॉक के माध्यम से न्यूनतम समय के लिए रेल रोककर खुदाई एवं ब्लॉक को क्रेन के माध्यम से रखकर भूमिगत मार्ग तैयार कर दिया जाता है।निश्चित रूप से मानव रहित फाटकों को हटाकर इन फाटकों पर होने वाली रेल दुर्घटनाओं को रोकने में काफी मदद मिली है।
इस समय भारतीय रेलवे ब्रॉड गेज लाइनों पर सभी मानव रहित फाटकों को समाप्त करने के लिए कार्यरत है।
भारतीय रेलवे के अंतर्गत कुल मिलाकर 28 हजार से अधिक लेवल क्रॉसिंग्स हैं। इनमें से लगभग 19 हजार लेवल क्रॉसिंग्स मानव द्वारा संचालित किए जाते हैं और इनमें लगभग 9 हजार लेवल क्रॉसिंग्स मानव रहित है। मानव रहित कुल फाटकों में से करीब 6 हजार लेवल क्रॉसिंग्स ब्रॉड गेज नेटवर्क पर हैं, जिन्हें समाप्त करने को रेलवे द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
भारतीय रेलवे ने पहले चरण के दौरान ब्रॉड गेज लाइन मानव रहित फाटकों की जगह भूमिगत पारगमन पथ निर्माण का कार्य शुरू किया था। इसके लिए जिन मार्गों पर शून्य/नगण्य ट्रेन व्हीकल यूनिट (टीवीयू) हैं, उन्हें बंद करने का प्रस्ताव है। इसी प्रकार कुछ मानव सहित/मानव रहित स्तर के फाटक या भूमिगत/सड़क मार्ग/रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) को आपस में मिलाने के लिए भी रेलवे प्रयासरत है।
2015-16 के दौरान रेलवे ने लगभग ग्यारह सौ लेवल क्रॉसिंग्स और बारह सौ से अधिक लेवल क्रॉसिंग्स समाप्त किए। रेलवे अपना लक्ष्य हासिल कर चुका है
समस्त सकारात्मक पहलुओं के बावजूद रेलवे का मुख्य लक्ष्य केवल मानव रहित फाटकों को हटाकर उनके स्थान पर भूमिगत पारगमन पथ का निर्माण करना है।वह भी आनन फानन में।कंक्रीट ब्लॉक को छोड़कर अन्य कोई मानक शायद निर्धारित नही किया गया है।सड़क भूतल से अधिकतम एवं न्यूनतम गहराई का कोई ध्यान नही रखा जा रहा है।सुगम एवं बाधा रहित आवागमन के लिए गहराई एवं ढाल अनुपात तथा जलनिकासी के लिए कोई व्यवस्था नही की गई है।ऐसे में रेलवे द्वारा बनाये जा रहे ये भूमिगत पारगमन पथ लोक-परिवहन एवं लोक जीवन के बाधक तत्वों के रूप में सामने आ रहे हैं।कहीं कहीं रेलवे ने अपनी सुविधानुसार भू-फाटकों का निर्माण करके सामान्य जनता का जीवन दूभर कर दिया है।कहीं कहीं ढाल के अनुपात में गहराई इतनी अधिक है कि वृद्ध व्यक्ति, एवं पशु गाड़ी से लेकर भारयुक्त आधुनिक वाहनों को भी इन्हें पार करना बहुत कठिन होता है।केवल ब्लॉक बनाकर रेलवे ने खानापूर्ति कर दी है एवं शेष मार्ग को परिवहन योग्य न बनाकर कच्चा छोड़ दिया गया है जहां वाहनों से उड़ती धूल बीमारियों की वाहक बन रही है।बरसात के दिनों में गम्भीर बीमारी की स्थिति में बीमार व्यक्ति की मौत तय मानी जा सकता है क्योंकि इन भूफाटकों में 3-4 फिट तक पानी का भराव देखा गया है जहां से किसी वाहन अथवा पैदल यात्री का निकलना मुश्किल है।अभी हाल ही में हुई बरसात के दौरान मुझे सहारनपुर से अपने गांव हथछोया जाना पड़ा।थानाभवन पहुंचने पर भूफाटक के नीचे से गुजरना पड़ता है।वहां 3-3 मीटर पाने भरने से मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध था।एक ट्रैक्टर सवार ने दुस्साहस किया तो वह ट्रैक्टर पानी मे फंसा बैठा। खुद मुझे गाड़ी वापस घुमाकर जलालाबाद होते हुए तीतरों से गांव पहुंचना पड़ा।समय और धन दोनों की बर्बादी हुई।
किसान एवं पैदल यात्रियों एवं आसपास की आबादी के लिए ये भूफाटक किसी मौत के कुएं से कम नही हैं।गन्ने एवं अन्य फसलों के परिवहन के लिए कृषकों द्वारा पशुगाडी अथवा ट्रैक्टर का उपयोग किया जाता है।इन भूफाटको से होकर कोई भैंसा 15-20 कुंतल गन्ना लेकर चढ़ाई करके सड़क पर चढ़ सके अभी तक यह सम्भव नही होता देखा गया है।किसानों द्वारा प्रयास करने पर कई बार बुग्गी भैंसा वजन के कारण चढ़ाई से पीछे फिसल जाता है।इस प्रकार दुर्घटना होने से पशु एवं व्यक्ति की जान माल का खतरा बढ़ गया है।इससे किसानों को वैकल्पिक एवं लम्बा रास्ता परिवहन के लिए चुनना पड़ता है जो उनका श्रम व धन दोनों की बर्बादी का कारण बन रहा है।इस विषय में रेलवे को एक समग्र योजना बनानी चाहिए ताकि आम जन के समय एवं धन की बर्बादी को रोकते हुए,सुविधाजनक पारगमन सुनिश्चित कराया जा सके।
(लेखक राज्यकर विभाग उ.प्र. में असिस्टेंट कमिश्नर हैं,प्रस्तुत विचार में लेखक की निजिराय प्रस्तुत की गई है।)
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