25 सितम्बर को भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों के लिए सौभाग्य योजना के तहत आठ विभिन्न योजनाओं का शुभारंभ किया।इन योजनाओं से देश के तीन करोड़ से अधिक गरीबो का लाभ मिलेगा।इन योजनाओं का यदि धरातल पर ईमानदारी और जिम्मेदारी से क्रियान्वयन हुआ तो निश्चित ही ये नए भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होने वाली हैं।
इनमें सबसे पहली एवं क्रांतिकारी योजना है "सहज बिजली हर घर योजना" इस योजना के तहत 31 मार्च 2019 तक देश के हर घर तक 24 घण्टे बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।योजना के अंतर्गत गरीबों के लिए मात्र पांच सौ रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।यह पांच सौ रुपये भी लाभार्थी को पचास रुपये प्रतिमाह की दस किस्तों में चुकाना है।जहां बिजली नही पहुंच सकती है वहाँ सौर ऊर्जा के माध्यम से घरों को जगमगाया जाएगा।ऐसे लोगों को सौर पैनल के साथ पांच एलईडी बल्ब तथा बैटरी सहित बैटरी चलित पंखा दिया जाएगा।खास बात यह है कि 5 वर्ष तक इसकी मरम्मत का खर्च भी सरकार उठाएगी।
सौभाग्य योजना के तहत चार करोड़ घरों को बिजली दी जाएगी। इस पर कुल 16,320 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिसका बड़ा हिस्सा (12,320 करोड़ रुपये) केंद्रीय बजट से दिया जाएगा। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र पर खास ध्यान होगा क्योंकि 90 फीसद बिना बिजली वाले घर गांवों में ही है। उक्त आवंटन का 14,025 करोड़ रुपये ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए दिया जाएगा। सरकार के वर्ष 2011 के समाजिक आर्थिक व जातिगत जनगणना के आधार पर यह स्कीम लागू की जाएगी। इस जनगणना में आने वाले सभी परिवारों को मुफ्त बिजली दी जाएगी। लेकिन इसके अलावा जो अन्य परिवार बिजली कनेक्शन लेना चाहेंगे उन्हें महज 500 रुपये देने पर बिजली कनेक्शन मिल जाएगा। और इसका भुगतान भी उन्हें मासिक किस्त में देने की सुविधा मिलेगी। जहां सामान्य बिजली कनेक्शन नहीं होगी मसलन दूर दराज के गांवों के घरों को सोलर कनेक्शन दिया जाएगा। इन घरों को पांच एलईडी बल्ब, एक डीसी फैन और एक पावर प्लग को चलाने वाला सौर बैट्री बैंक दिया जाएगा।
सौभाग्य को लांच करते हुए पीएम मोदी ने कहा ''अभी तक किसी ने सोचा नहीं था कि एक सरकार ऐसी भी आएगी जो लोगों के घर घर जा कर बिजली कनेक्शन देगी।'' दरअसल, इस योजना के तहत बिजली वितरण कंपनियों के अधिकारी स्वयं सरकारी डाटा के हिसाब से उन घरों में जाएंगे जहां बिजली कनेक्शन नहीं है और घर के मुखिया के आधार कार्ड को देख कर बिजली कनेक्शन हाथों हाथ देंगे। इसके बाद हर घर को चौबीसों घंटे, स्थाई बिजली देने का काम बचेगा जिसे पूरा किया जाएगा।
उज्जवला से जहां हर गरीब के घर में स्वच्छ एलपीजी से खाना पकेगा वहीं सौभाग्य से हर घर को रौशनी मिल सकेगी। पीएम मोदी ने सौभाग्य योजना की लांचिंग पेट्रोलियम क्षेत्र की सरकार कंपनी ओएनजीसी के नए भवन से की।
आधुनिक युग की आधारभूत आवश्यकताओं में बिजली एक महत्वपूर्ण अवयव है।बच्चों की पढ़ाई,पानी की आपूर्ति,रात्रि में सुरक्षा उपाय एवं अंधेरे के अपराधों से बचाव, मोबाइल एवं कम्प्यूटर चलाना बिना बिजली के एक दुरूह कार्य है।आजकल बैटरी चालित रिक्शा एवं स्कूटी का प्रयोग भी तेजी से बढ़ रहा है।इस प्रकार बिजली पारंपरिक फॉसिल फ्यूल का एक बेहतर विकल्प होने के कारण पर्यावरण हितैषी भी है।खासकर सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ने से देश मे घरेलु उद्योग एवं रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।सौर पैनल में स्टील पाइप्स की जरूरत होती है जिससे लोहा उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
सबसे बड़ा सुकून इस बात का है कि प्रधानमंत्री के लिए गरीब जनता के प्रति कुछ कर गुजरने की चाहत है।सत्ता संभालने के बाद से अब तक 3 करोड़ से लोगों को जनधन खातों के द्वारा बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जा चुका है, गरीबी पहले भी सत्ताधीशों के केंद्र में रही है।कांग्रेस की इंदिरा सरकार ने "गरीबी हटाओ" का नारा भी दिया था।उससे आम जनता की तो नही हाँ, अनेक कांग्रेसी कारिंदों की दरिद्रता जरूर दूर हुई है।जहां पिछली सरकारों द्वारा गरीब की झोपड़ी में रोशनी और चूल्हे के लिए ईंधन के लिए मिट्टी तेल योजनाओं में खेल करके अरबों की रकम दलाल डकार गए वहीं मोदी सरकार गरीब के8 रसोई तक उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सिलेंडर और चूल्हा पहुंचा चुकी है।जिससे गरीबों को पहली बार यह एहसास हुआ है कि हाईवे से गुजर रहा विकास कंटीली पगडंडियों से होते हुए उनके दरवाजे भी पहुंच गया है।
भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने "शून्य सहिष्णुता" अपनाई हुई है इसका सुखद परिणाम यह है कि गत तीन वर्षों में कोई घोटाला सामने नही आया है।इसका बड़ा कारण यह है कि मोदी जी खुद कहते हैं कि मेरा कोई रिश्तेदार नही है,भ्रष्टाचार करने वाला बख्सा नही जाएगा।मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री है जिन्होंने सार्वजनिक घोषणा की है कि "सत्ता सेवा करने के लिए होती है,भोगने के लिए नही"। विपक्ष लोकतंत्र की जान होता है इसलिए विपक्ष को विकास में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।इस समय देश का विपक्ष भ्रमित है और वह "मुद्दे एवं मोदी" के बीच लटका हुआ है और निर्णय नही ले पा रहा है कि विरोध मोदी का करना है या मुद्दों का।
दिशाहीन विपक्ष विकास के मुद्दों पर सकारात्मक बदलाव के लिए सरकार पर दबाव बनाने के बजाय सिर्फ मोदी विरोध तक सीमित हो गया है और कुंठाग्रस्त होकर असंसदीय शब्दों के प्रयोग पर उतारू हो गया है।विपक्ष को लगता है कि "रूढ़िवादी धर्मनिरपेक्षता" उसकी चुनावी वैतरणी पार लगा देगी।विपक्ष ने धर्मनिरपेक्षता को हिन्दू प्रतीकों,भावनाओं,विचारों,देवी-देवताओं के तिरस्कार तक सीमित कर दिया है।विपक्ष की यही रणनीति है जिसने देश के बहुसंख्यक समाज को अब वोट बैंक में परिवर्तित कर दिया है।अल्पसंख्यक होने का अर्थ जनसंख्या के आधार पर वास्तविक पन्थ जैन,बौद्ध,सिख,इसाई नही रह गया है वरन देश के दूसरे सबसे बड़े बहुसंख्यक समुदाय को जबरन अल्पसंख्यक प्रचारित करके वोट साधना विपक्ष का एकमात्र एजेंडा रह गया है।इसका खामियाजा देश के मुस्लिम समाज को भी समय समय पर उठाना पड़ता है।अन्य समाजों में उनके प्रति अविश्वास में वृद्धि हुई है जिसका कारण विपक्ष की उद्देश्य रहित राजनीति रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की वैश्विक छवि में सकारात्मक बदलाव किया है,लेकिन विपक्ष वहां भी ओछी राजनीत करने से बाज नही आता है।
रोहिंग्या घुसपैठ पर मोदी सरकार के कठोर रवैये ने देश के बहुसंख्यक समाज मे उनके प्रति लगाव को और अधिक बढ़ाया है जबकि इस मुद्दे ने विपक्ष को अनावरित कर दिया है,क्योंकि जो विपक्ष और मुस्लिम नेता कभी कश्मीरी शरणार्थियों के लिए एक शब्द नही बोले वह रोहिंग्या आतंकियों को शरण देने की पैरवी करते नजर आए।रोहिंज्ञाओं को लेकर एक बड़ा सवाल और उठा जिसका जबाब न तो विपक्ष देना चाहता और न ही तथाकथित मानवाधिकारवादी! सवाल यह है कि आखिर कैसे कश्मीर में 20000 रोहिंग्या मुसलमान बसने में कामयाब हो गए। रोहिंग्या 1किमी दूर चीन जाने की बजाय 2100 किमी कश्मीर में क्यों जाना चाहते हैं।इस बात को मोदी सरकार ने समझा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी , रोहिंग्या और अन्य आतंकी संगठनों के बीच गठजोड़ का पता लगाने में कामयाब हुई और मोदी सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों को उनके देश म्यांमार वापस भेजने का कड़ा निर्णय लिया जो देश का बहुसंख्यक समाज भी चाहता है।
(लेख में प्रकाशित विचार लेखक की निजिराय को व्यक्त करते हैं)
Monday, September 25, 2017
सौभाग्य से जगी नये भारत की उम्मीद
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