लोकतंत्र एवं धर्मनिरपेक्षता की आड़ में ज़ेहादी ताक़तें वास्तव में इस्लामी शरिया कानून की बाड़बंदी करके देश के संवैधानिक प्रावधानों का शरीयत के प्रति अधिकतम अनुकूलन करना चाहती हैं।जो कि ज़ेहाद का गैर-मुस्लिम देशों में एक अनिवार्य हिस्सा है।दरअसल आल इंडिया सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड,जो कि एक मुस्लिम एनजीओ है और हिन्दुस्थान में ज़ेहाद की गवर्निंग बॉडी है, ने राम मंदिर प्रकरण का सर्वमान्य हल निकालने के लिए बोर्ड के सदस्य मौलाना सलमान हुसैन नदवी ने बयान दिया था कि कुरान में मस्जिद को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किये जाने का प्रावधान है।नदवी के बयान के बाद देश मे तमाम ज़ेहादी ताक़तों में हड़कंप मच गया।इस पर हैदराबाद में में पर्सनल लॉ बोर्ड की आपात बैठक बुलाकर नदवी को बोर्ड से निकाल दिया गया है।
यह एक सामान्य घटना नही है।असल में मौलाना सलमान हुसैन नदवी का बयान ज़ेहाद की "नाशित" विंग के उसूलों के खिलाफ है।इसलिए उन पर तत्काल कार्यवाही करते हुए इस नाशित ज़ेहाद गवर्निंग बॉडी ने नदवी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।नदवी ने पर्सनल लॉ बोर्ड से नाराजगी जाहिर करते हुए इसे तत्काल भंग करने की मांग करते हुए "शरीयत एप्लिकेशन बोर्ड" के गठन का सुझाव रखा है।नदवी का यह प्रस्ताव भी जिहाद की "नाशित" विंग के ही अनुकूल है।देश मे 26 जनवरी 1950 से संविधान लागू है,ऐसे में शरीयत एप्लिकेशन बोर्ड या आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड न केवल असंवैधानिक है वरन अवांछनीय भी।
ज़ेहाद की अवधारणा को समझना जरूरी है।जिहाद इस्लाम का एक महत्वपूर्ण घटक है जिसके बल पर ही सम्पूर्ण विश्व मे इस्लाम का प्रसार हुआ है।वहाबी,सल्फी या अहले हदीश इस्लाम की वह धारा है जिससे जाने अनजाने में देश के मुस्लिम पंथ का एक बड़ा तबका प्रभावित होता जा रहा हैं।
वास्तव में, अपनी विचारधारा को आतंक के बल पर प्रसारित करने के लिए सल्फी इस्लाम ने व्यावसायिक रूप से एक व्यवस्थित जिहाद छेड़ी है।इस जिहाद को तीन इकाइयों के द्वारा संपादित किया जा रहा है।
अलमिशफू ( स्लीपर सेल), नाशित (राजनीतिक कार्यकर्ता) एवं जेहादी ( आत्मघाती दस्ते)
जिहाद के ये तीन यंत्र इस प्रकार है:
1-अलमिशफू- ये चुपचाप और गैर-राजनैतिक रहकर देश की जड़े खोखला कर रहे हैं।
2-नाशित: ये सक्रिय राजनीति में भाग लेकर सेकुलर लबादा ओढ़कर शासन को शरिया के अनुकूलन के लिए कार्य करते है।
3-जिहादी: ये कुफ्र,शिर्क,इज्तिहाद और तक़लीद (ज्ञान,बुध्दि से बहस करना) वालों का खून बहाते हैं।
सावधान रहिये।अफगानिस्तान से सिकुड़कर वर्तमान स्वरूप वाले देश को भी ये तोड़ने में लगे हैं।।
इस प्रकार स्पष्ट है कि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश मे ज़ेहाद की मुख्य गवर्निंग बॉडी के रूप में काम करता है।यह एक एनजीओ मात्र है जिसकी कू वैधानिक हैसियत न होते है भी यह इसकी स्थापना से आज तक एक प्रमुख मुस्लिम दबाव समूह के रूप में कार्य करता है।यह हर उस आधुनिक सामाजिक,आर्थिक,राजनीतिक एवं अन्य सभी सुधारों के धर्मनिरपेक्षता एवं लोकतंत्र की आड़ में विरोध करता है जो शरिया कानून के लिहाज से जायज़ नही है।इस प्रकार यह देश के कानून को शरिया के अधिकतम अनुकूलन के लिए कार्य करता है।
जेहाद किसके खिलाफ ?
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सल्फी प्रमेय के लिए धार्मिक रूप से कट्टर मोमिन तैयार करना जरुरी है।यह तभी सम्भव है जब मुस्लिमों को हर प्रकार से उनकी जड़ों से काटकर उन्हें आम स्थानीय समाज से अलगाव की राह पर लाया जाये।लेकिन यह एक ऐसा मार्ग है जिसने गैर-मुस्लिमों (काफिरों) के साथ किये जाने वाली जेहाद की तोप का मुंह खुद उदारवादी आधुनिक इस्लाम के विरुद्ध मोड़ दिया।सल्फियत के लिए इस्लाम के भीतर ही पर्याप्त रूप से काफ़िर मौजूद हैं।जिनके विरुद्ध जेहाद जरूरी समझा जा रहा है।सूफीवादी, बरेलवी, शिया, अहमदिया, कादियानी उदार किस्म के मुस्लिम है।खुद इज्मा एवं कयास में विश्वास रखने वाला आम मुस्लिम भी सल्फी इस्लाम के लिए काफिर है, जिसके लिए मौत मुकर्रर करना जेहादी के लिए जरूरी है। 24 नवम्बर 2017 को मिश्र के सिनाई प्रायद्वीप में सूफी मस्जिद पर सेल्फियों ने हमला किया ।इस हमले में 235 नमाजी उस समय मारे गए जब वे नमाज पढ़ रहे थे।
यहां दो बातें महत्वपूर्ण एवं बिल्कुल स्पष्ट हैं:
1- सल्फी जेहाद इस्लाम के उदार पंथों जिनमे सूफी भी हैं, के खिलाफ है।
2- इस्लाम खतरे में है और उसे यह खतरा हिंदुओं या ईसाइयों से नही बल्कि खुद इस्लाम से ही है।
असहिष्णुता का अतिवादी संस्करण सल्फियत/वहाबी/अहले हदीश हमेशा "इस्लाम खतरे में" का नारा लगाता रहा है जिसके निहितार्थ अब दुनिया के सामने प्रकट हो रहे हैं।यानि सल्फी इस्लाम मुसलमानों को खतरा दिखाकर अपना कट्टरवादी एजेंडा चलाता रहा है।वह खुद को ,इस्लाम के सबसे घातक शत्रु के रुपवमे तैयार करता रहा है।
इस्लामी देशों में जंग क्यों?
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सल्फी/अहले हदिशी इस्लाम के अनुयायी अपने मदरसों एवं मस्जिदों के पाठ्यक्रम में जहर घोलकर मासूम बच्चों को पिलाते हैं।उनके पाठ्यक्रम का जरूरी अंश है कि " राष्ट्र-राज्य" सरकारें गैर-इस्लामी एवं कुफ्र हैं।पूरी दुनिया मे खलीफा की हुकूमत कायम करनेबके लिए जब भी हमारे पास ताकत होगी तो हम उन गैर-इस्लामी हुकूमतों को उखाड़ फेंकेंगे। इस्लाम बाहुल्य देशों में उन गैर-इस्लामी हुकूमतों को उखाड़कर खलीफा के शासन की स्थापना के लिए जंग जारी है।जिसमें मुस्लिमों द्वारा,मुस्लिमों के लिये, मुस्लिमों के खिलाफ़ जेहाद जारी है। मिश्र में 2011 में मुस्लिम ब्रदरहुड द्वारा ऐसी सरकार को उखाड़ फेंका गया था।जिसके बाद लगातार खून खराबा चालू है।
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