Thursday, February 22, 2018

पूर्वोत्तर पर मंडराता खतरा..


सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा एवं बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ पर दिए बयान पर कई पार्टियों ने आदतन राजनीतिक रोटियां सेकनी प्रारम्भ कर दी है।किस पार्टी ने सेना प्रमुख की सुरक्षा प्रमेय पर किस प्रकार प्रतिक्रिया दी है,यह मेरे विश्लेषण का विषय नही है।
पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा के लिए बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ एक बड़ा खतरा रहा है लेकिन कई सियासी पार्टियों ने इसे अपने राजनीतिक लाभ लेने के कारण हमेशा ही नजरअंदाज किया है। बांग्लादेशी मुस्लिम जनसंख्या की बड़ी संख्या में असम की सीमांत जिलों में घुसपैठ के कारण ही आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट नाम सियासी दल तेजी से उभरा है।इसके अध्यक्ष अजमल खान है जिनका बांग्लादेशी घुसपैठियों को पूरा संरक्षण प्राप्त है।
दरअसल असम के कई जिलों में मुस्लिम जनसंख्या में पिछले वर्षों में अप्रत्याशित दर्ज की गई। इस अप्रत्याशित वृद्धि को सेना प्रमुख गम्भीरता से लिया है।इसी अवैध जनसंख्या के बल पर असम में बदरुद्दीन अजमल की राजनीतिक पार्टी ने अप्रत्याशित सफलता प्राप्त की है।अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ की चर्चा करते हुए सेना प्रमुख ने कहा है कि जनसंघ/भाजपा की तुलना में इस पार्टी ने कई गुणा तेजी से वृद्धि की है जिसका कारण असम के सीमावर्ती जिलों में बांग्लादेशी मुस्लिमों द्वारा घुसपैठ करके मतदाता सूची में खुद को शामिल कराना रहा है।
असम एवं पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में बांग्लादेश से हो रही घुसपैठ के लिए सेना प्रमुख ने दो प्रमुख कारकों को जिम्मेदार माना है।
1- बांग्लादेश में अधिक जनसंख्या घनत्व की तुलना में मानसूनी समय मे रहने के लिए अपर्याप्त भूमि।
2-चीन एवं पाकिस्तान द्वारा सुनियोजित तरीके से भारत को खंडित करने की नीयत से घुसपैठ कराना।

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का मानना है कि छद्मयुद्ध की रणनीति के तहत पाकिस्तान, पूर्वोत्तर को अशांत रखने के उद्देश्य से चीन के सहयोग से वहां ‘योजनाबद्ध’ तरीके से बांग्लादेश से मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ करवा रहा है। सेना प्रमुख ने बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ की 1980 के दशक में स्थापित भारतीय जनता पार्टी के क्रमिक विकास के साथ तुलना करते हुए कहा कि राज्य में अजमल की पार्टी का उभार भाजपा के विकास से अधिक तेज रहा।दरअसल सेना प्रमुख के नाते जनरल बिपिन रावत छद्मयद्ध के द्वारा दुश्मन द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र पर नियंत्रण की योजना के प्रति चिंता जाहिर कर रहे थे जिसके रणनीतिक एवं उपयुक्त कारण उपलब्ध हैं। जनरल रावत का मुस्लिम घुसपैठ संबंधी बयान राजनीतिक कार्यक्रम में नही बल्कि पूर्वोत्तर की सुरक्षा से संबंधित सम्मेलन में दिया गया है।अतः सेना प्रमुख के बयान के राजनीतिक निहितार्थ निकालने वाले नेता एवं दल जानबूझकर पूर्वोत्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र की वास्तविक समस्या से देश का ध्यान हटाकर इसे राजनीतिक एवं धार्मिक रंग दे रहे हैं,जो सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद खतरनाक मनोवृत्ति है।जनरल रावत ने देश के पश्चिमी पड़ोसी की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि, ‘हमारे पश्चिमी पड़ोसी के चलते योजनाबद्ध तरीके से अवैध घुसपैठ हो रही है।उसकी हमेशा कोशिश रहती है और वह सुनिश्चित करना चाहता है कि परोक्ष युद्ध के जरिए पूर्वोत्तर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया जाए।’ यह कार्य पाकिस्तान द्वारा चीन की मदद से किया जा रहा है। सेना प्रमुख का कहना है कि ‘मैं समझता हूं कि हमारा पश्चिमी पड़ोसी इस क्षेत्र को समस्याग्रस्त बनाए रखने के लिए हमारे उत्तरी पड़ोसी (चीन) की मदद से बहुत अच्छी तरह परोक्ष युद्ध खेलता है। हमें भविष्य में कुछ और प्रवासन नजर आयेंगे।जिसका हल समस्या की पहचान और समग्र दृष्टि से उसपर गौर करने में ही निहित है।" असम में अवैध बांग्लादेशियों की घुसपैठ वर्षों से एक बड़ा मुद्दा है।इसी मुद्दे पर पिछले वर्षों में वहां भाजपा सरकार बना चुकी है। राज्य सरकार राज्य में अवैध ढ़ंग से रह रहे लोगों का पता लगाने के लिए अब राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार करवा रही है।ताकि अवैध घुसपैठ करने वालों को मतदान एवं अन्य आवश्यक नागरिक अधिकारों से वंचित किया जा सके।
ज्ञातव्य है कि 1984 में भाजपा ने महज दो सीटें जीती थीं जिसका जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि ‘एआईयूडीएफ नामक एक पार्टी है।यदि आप उस पर नजर डालें तो आप पायेंगे कि भाजपा को उभरने में सालों लग गए, जबकि वह पार्टी बिल्कुल कम समय में उभरी।’ उन्होंने कहा, ‘एआईयूडीएफ असम में तेजी से बढ़ रही है।’ यह दल मुस्लिमों के पैरोकार के रुप में 2005 में बना था और फिलहाल लोकसभा में उसके तीन सांसद और असम विधानसभा में 13 विधायक हैं।
असम की जनसंख्या पर एक नजर:
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असम में बांग्लादेशी मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ के चलते वर्ष 1991 से 2001 के बीच असम के छह जिले मुस्लिम बहुल हो चुके हैं। विदेशी मिशनरी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पूर्वोत्तर राज्यों में भारत विरोधी षड्यंत्रों में लिप्त हैं।
ये विदेशी ताकतें विद्रोही उल्फा एवं नागालैंड के विद्रोही गुटों के साथ इस क्षेत्र में हिंदी भाषियों पर आक्रमण करके उन्हें आतंकित एवं हत्याएं करते हैं ताकि पूर्वोत्तर को राष्ट्रवादी ताकतों से खाली करवाकर,सुनियोजित तरीके से अवैध बांग्लादेशियों को बसाकर,पूर्वोत्तर क्षेत्र पर कब्जा किया जा सके।


उल्फा लम्बे समय से बिहार एवं उत्तर प्रदेश से असम में रोजगार के लिए गए लोगों को अपना निशाना बना रही है। हिन्दी भाषी इलाकों में आए दिन बम विस्फोट हो रहे हैं। इस कारण असम से हिन्दी भाषी लोग पलायन भी कर रहे हैं। श्रमिकों की भरपाई षड्यंत्र के अनुसार बंगलादेशी मुसलमानों से की जा रही है। और देखते-देखते असम में मुसलमानों की जनसंख्या में जबरदस्त बढ़ोत्तरी होती जा रही है।
असम में सन् 1991 से 2001 तक दस वर्ष में मुसलमानों की जनसंख्या में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। मुस्लिमों की सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी निचले असम के नगांव जिले में हुई है। वहां मुस्लिमों की संख्या में 2,86,954 की वृद्धि हुई है। ध्यान रहे, यह केवल एक जिले की बात है। आज असम के 6 जिलों में मुसलमानों की संख्या हिन्दुओं से अधिक है। वे जिले हैं, 1. धुबरी  2. ग्वालपारा 3. 4. नगांव 5. करीमगंज 6. हैलाकाण्डी। असम में मुसलमानों की आबादी की तीव्र वृद्धि के पीछे बंगलादेशी मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। असल में भारत-बंगलादेश के बीच कई स्थानों पर सीमा खुली होने के कारण बंगलादेशी आसानी से असम में प्रवेश कर जाते हैं। बाद में यही लोग, असम में हिन्दी-भाषी मजदूरों की हत्या करके अन्य बंगलादेशी घुसपैठियों को भी बुलाकर मजदूरी दिलवा देते हैं।राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अवैध घुसपैठ एक बड़ा खतरा बनकर उभरी है।असम में मुसलमानों की अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी से वहां रह रहीं जनजातियों और हिन्दू समुदाय पर खतरा मंडराने लगा है। असम के मुस्लिम बहुल जिलों में तेजी से अलगाव भड़क रहा है।
बढ़ती हुई मुस्लिम जनसंख्या के कारण असम के हिन्दू समाज के धार्मिक स्थलों और सत्रों (वैष्णव मंदिर) का अस्तित्व संकट में है। आज असम में 814 सत्रों की 1,080 बीघा जमीन पर मुस्लिम तत्वों ने जबरन कब्जा किया हुआ है।हाल ही में असम राज्य सरकार ने इन सत्रों के संरक्षण के लिए सर्वेक्षण कार्य भी शुरू कर दिया है। ताकि इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



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