वो दहशतगर्द है,उसका कोई दीन नही।
ये मीठी शीर है,नमकीन नही,
पहले मिटने तो दे अपनी हस्ती।
फिर मैं एक और तुम तीन नही।
चेहरे पर तेरे,मुस्कान बहुत है।
अब तन्हाई में रोते हो शायद।।
बर्बादी का मंजर तुझे सुकून देता है,
बर्बाद गर तेरा कोई अपना न हो।
@सुनीलसत्यम
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