केंद्र के साथ साथ राज्यों में भी TET परीक्षा लागू कर दी गई है. बेरोजगारी का आलम है की आप किसी भी चीज के लिए कोई परीक्षा पद्दति लागु कर दे तो दो चार लाख की भीड़ आराम से मिल जाएगी. जिस किसी भी महाशय ने शिक्षकों की योग्यता परखने के लिए टेट का सुझाव दिया होगा वह भी अपने आप को धन्य मान रहा होगा की उसका दिया सुझाव लागू हो गया है..
टेट की नौटंकी की कीमत लाखों बेरोजगार युवक आर्थिक और मानसिक दोनों प्रकार से चुकायेंगे. टेट एक नौटंकी परीक्षा है यह किसी रोजगार की गारंटी नहीं है. tet का अर्थ है teacher 's elegibility test अर्थात अध्यापक पात्रता (योग्यता) परीक्षा . यह परीक्षा पास करने वालो को योग्यता का प्रमाण पत्र मिलेगा जो इस बात का प्रमाण होगा का certificate धारक अध्यापक नियुक्त किये जाने के योग्य है..लेकिन उसकी योग्यता का यह प्रमाण पत्र उसे जीवनभर कही अध्यापक नियुक्त करवा सकेगा इस बात की कोई गारंटी नहीं है.यानि कि जीवन भर युवक को हताशामय जिंदगी जीने की गारंटी जरुर मिलेगी...धारक को हमेशा एक बात सालती रहेगी की योग्य होने के बावजूद भी उसके पास नौकरी नहीं है.
टेट का दूसरा पहलु यह है की टेट की परीक्षा पास करने के बाद भी प्रमाण पत्र धारक को नोकरी पाने के लिए दोबारा परीक्षा पास करनी होगी. जब दोबारा, तिबारा परीक्षा पास करके ही नोकरी मिलनी है तो टेट के नाम पर युवा शक्ति की योग्यता का मखौल क्यों.?
हम सब जानते है की आज B.Ed. करने के नाम पर हजारो संस्थान कुकुरमुत्तों की भांति सड़क के दोनों किनारों पर उग आये है. वहां बी.एड. की डिग्री कैसे मिलाती है यह किसी से छुपा नहीं है..उत्तर प्रदेश सरकार ने विशिष्ट बी.टी.सी की शुरुवात की थी ..जिसने प्रदेश में हजारो युवको को रोजगार तो दिया लेकिन उनकी योग्यता आंकने के लिए कोई परीक्षा क्यों नहीं ली गई ? इस बात पर कोई प्रशन कही किसी ने नहीं पूछा. जब यही सब होना है तो फिर टेट का नाटक क्यों? और अगर टेट परीक्षा से योग्यता की परीक्षा होनी है ( जो संभव है ) तो फिर टेट पास करने के बाद भी नौकरी की गारंटी क्यों नहीं.?
सवाल यह है की युवा शक्ति की शक्ति का मखौल कब तक उड़ाया जाता रहेगा..क्या वास्तव में कोई राजनितिक दल युवा शक्ति की शक्ति का राष्ट्रहित में सदुपयोग कर पायेगा.
कुंवर सत्यम.
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