Tuesday, January 12, 2016

तेरी मुहब्बत में खाक हो जाऊँ..

देश मेरे,तेरी मुहब्बत में,गर मैं खाक हो जाऊ,
बिना काशी बिना काबा गए ही पाक हो जाऊँ..
चाहत जन्नत की न मुझे,न तख्तोंताज ही चाहूँ..
तेरी खातिर दोजख पर, मैं कुरबाँ लाख हो जाऊ..
बिना मंदिर,बिना मस्ज़िद गए ही पाक हो जाऊँ...
तू ही नबी मेरा,मेरा भगवान् भी तूही
राहे-क़ुरबानी में,
भगत बन जाऊं,कभी अशफाक हो जाऊँ..
बिना तीरथ,बिना कोई हज़ किये ही पाक हो जाऊँ..
मुझे जिन्दा जला देना या सूली चढ़ा देना..
शाने-वतन में गर, कभी गुस्ताख हो जाऊँ..
बिना रोजे,बिना उपवास, किए ही पाक हो जाऊँ..
# पठानकोट शहीदों को समर्पित
                         @सुनील सत्यम

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