Tuesday, January 12, 2016

अल्पसंख्यक कौन ?

संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार जिस समुदाय की जनसँख्या कुल जनसँख्या का 3% या उससे कम हो उसे अल्पसंख्यक समुदाय माना जाना चाहिए।भारत में 3% जनसंख्या सिर्फ सिख,जैन,बौद्ध एवम् ईसाईयों की है।इस लिहाज से देश में सिर्फ यही समुदाय अल्पसंख्यक है।मुस्लिमों की जनसंख्या देश की कुल आबादी के लगभग 15% से अधिक है।इसलिए मुस्लिम समुदाय वास्तव में अल्पसंख्यक की श्रेणी में नहीं आता है!
     लेकिन देश में राजनितिक कारणों से मुस्लिम समुदाय को भी अल्पसंख्यक का दर्जा मिला हुआ है।
वास्तव में भारतवर्ष के आकार को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर किसी समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दे देना न्यायोचित नहीं है क्योंकि हर प्रदेश,हर जनपद और यहाँ तक कि ब्लाक एवं ग्राम स्तर तक समुदायों की जनसंख्या का वितरण एक जैसा नहीं है। विभिन्न समुदायों का विभिन्न क्षेत्रों में वितरण का पैटर्न एक जैसा नहीं है।इसलिए देश में विभिन्न समुदायों को राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा न देकर क्षेत्रीय स्तर पर ही यह दर्जा दिया जाना चाहिए ताकि अल्पसंख्यकों को विकास की विभिन्न योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।उदाहरण के लिए जम्मू कश्मीर एवं नागालैंड जैसे प्रदेशों में हिन्दू अल्पसंख्यक है।देश के कई जनपदों जैसे उत्तर प्रदेश के रामपुर एवम् पश्चिमी बंगाल के माल्दा आदि जिलों में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं।
       संपूर्ण भारतवर्ष में यही स्थिति है।अतः यह न्यायोचित होगा कि प्रदेश,जनपद एवम् ब्लाक स्तर पर विभिन्न समुदायों की जनसंख्या के हिसाब से अल्पसंख्यक दर्जा देने की शुरुआत होनी चाहिए। तभी हम सभी अल्पसंख्यकों को न्याय दे सकेंगे।
# सुनील सत्यम

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