प्रिय मित्रो,
यह समय परिवर्तन का है। इतिहास गवाह है की परिवर्तन हमेश युवाओ ने किंये है.आजादी के बाद के आन्दोलन इस बात के सबूत है के आजादी दीवानों के सपने पूरे नही हुए है। सवाल उठता है आखिर क्यों ऐसा हुआ? जब आजादी के परवानों द्वारा इच्छित आजाद भारत हमें प्राप्त नही हुआ तो ऐसे मी हम क्या करें ? हम आजादी के सैट सैट लोकतंत्र के भी दीवाने हैं..हमारा मानना है की लोकतंत्र ही वो हतियार है जिसकी आज के युवाओ को जरुरत हैं.बस हमे इस हतियार को ज्यादा धर डर बनाना है...कैसे? यही वो सवाल है जिसके लिए हमें मंथन करना है..आओ यारो अपनी लोकतंत्र यात्रा को सुखद बनने के लिए उठाये कुछ भार अपने कन्धों पर..डगर कठिन जरूर है पर विजय सुनिश्चित है॥
बस हमे यद् रखना होगा के .....
आंधी क्या है तूफ़ान मिलें..बढ़ना ही अपना कम है.
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