Friday, March 14, 2008

जाना बहुत है दूर.

मित्रों आज का दौर बहुत ही दुविधापूर्ण है.कहाँ क्या चल रहा है पता चलना कठिन है...ऐसे मी बह्ताकने का डर बना रहता है। युवा वर्ग क्योंकि अधिक भावुक होता है सो उसके भटकने का ज्याद डर है। हम ऐसे युवाओं का मंच बनाना चाहते है जो मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठा सके ...बहरे कानों तक अपनी बात को पहुँचा सके.हमें बम और गोली में नही बल्कि दम और बोली मे विश्वास रखने वालो की जरुरत है।
आज देश को ऐसे यौंग पोलितिअनोस की जरूरत है जो जरुरत पड़ने पर चुनाओं मे उम्मीदवार का साक्षात्कार लेने से भी नही घबराए....और जरुरत पड़े टू ख़ुद चुनाव मैदान मे आए....जरुरत है अधिक से अधिक युवा .पढ़ा लिखा, स्वच्छ छवि का युवा राजनीती मे आए और नक्कारे बदमाशों को हराकर देश का भार कम करें.

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